आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पर्व कोई भी हो, पूजा किसी की हो लेकिन हनुमान जी की पूजा न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। मौका जन्मोत्सव का हो, तो उत्साह और भी बढ़ जाता है। जन्म के दूसरे दिन दीपावली को सुबह से रात तक उत्सव मनाया गया। मंदिरों में लोगों ने पहुंचकर हनुमान जी के समक्ष शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। भोर से ही हनुमान चालीसा और चौपाइयां गूंज रही थीं।
मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हनुमान जी का जन्म होता है। इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। अपने शहर में अमावस्या को हनुमान जी के दर्शन की परंपरा रही है और इस परंपरा को लोगों ने बखूबी निभाया। वैसे तो सभी हनुमान मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ रही, लेकिन प्राचीन हनुमानगढ़ी में सुबह से ही लोगों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था जो रात तक बना रहा। हनुमान जी को प्रिय लड्डू, चना के साथ लोग खासतौर पर तुलसी दल लेना नहीं भूले। बजरंगबली के दरबार में लोगों ने हाजिरी लगाकर भोग अर्पित किया और महंत शंकर सुअन उपाध्याय व छोटे महंत पवन उपाध्याय से आशीर्वाद प्राप्त किया। तमाम ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने मंदिर में ही बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और उसके बाद परिसर में स्थित अन्य मंदिरों में मत्था टेका। मंदिर की परिक्रमा की और उसके बाद पुजारी द्वारा दिए गए चरणामृत को ग्रहण कर खुद को धन्य महसूस किया। सुबह से ही भक्ति गीत के अडियो कैसेट बज रहे थे। शाम को सुंदरकांड का पाठ किया गया। प्राचीन मंदिर होने के कारण गली में होने के बाद भी लोग यहां आना नहीं भूलते।
रिपोर्ट-सुबास लाल