आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को कई तरह की समस्या का जोखिम बना रहता है जिसका असर भ्रूण पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अगर किसी गर्भवती को ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) यानि तपेदिक रोग हो जाय, तो यह चिंता का विषय बन सकता है। गर्भवती को गर्भावस्था के समय अपने शरीर में हो रहे हर छोटी, बड़ी समस्याओं के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।
डॉ.अख्तर ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है जो आमतौर पर लंग्स यानि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। टीबी का असर गर्भवती के साथ ही होने वाले शिशु पर भी पड़ सकता है, जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।
कोल्हूखोर ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉधनंजय पांडेय का कहना हैं कि गर्भावस्था में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की जांच करने के लिए निःशुल्क सुविधा दी जाती है। इनकी मदद से टीबी होने की जानकारी मिल सकती है। अगर इन जांचों के बाद गर्भवती महिला में टीबी का पता चल जाता है, तो इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
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सक्रिय टीबी रोगी खोजी अभियान में मिले 29 नये मरीज: डीटीओ
आजमगढ़। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 207 हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर में कार्यरत सीएचओ के माध्यम से सक्रिय क्षय रोगी खोजी अभियान 23 अगस्त से चल रहा है। पिछले 15 दिनों में टीबी के 29 नये मरीज खोजे गये और उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। अभियान के दौरान 15 दिनों में 2,07,105 लोगों की स्क्रीनिंग की गयी तथा 564 लोगों के बलगम की जांच की गयी जिसमें टीबी के नये 29 मरीज मिले हैं। उक्त जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ परवेज अख्तर ने दी।
रिपोर्ट-प्रमोद कुमार यादव