लोक अदालत में 128371 वादों के सापेक्ष 108518 वाद का हुआ निस्तारित

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्जवलित करके तथा वाग्देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया।
जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है, जिसके माध्यम से विवाद का निपटारा निःशुल्क व त्वरित किया जाता है। लोक अदालत में दिया गया फैसला अन्तिम होता है, उसके खिलाफ किसी उपरी न्यायालय में अपील नहीं होती हैं। लोक अदालत में दिये गये फैसले सुलह-समझौते के आधार पर होते हैं इसलिए पक्षकारों के बीच मतभेद भी समाप्त हो जाते है। इसमें न कोई जीतता है और न ही कोई हारता है।

लोक अदालत में निस्तारण हेतु कुल 128371 वाद चिन्हित किये गये थे, जिसमें कुल 108518 वाद निस्तारित हुए तथा रू0 268757769/- धनराशि का समझौता हुआ। प्रीलिटिगेशन स्तर पर 91833 तथा कोर्ट से 16685 दीवानी व फौजदारी वाद, राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित हुए। जनपद न्यायाधीश द्वारा 1 वाद का निस्तारण किया गया। मुकेश कुमार सिंह-प्रथम, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 126 वादों का, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नं0-01 द्वारा कुल 3 वादों का, कमलापति विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा 8 वादों का, अजय श्रीवास्तव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नं0-3 द्वारा 3 वादों का, विजय कुमार वर्मा, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट द्वारा कुल 562 वादों का, संतोष कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट द्वारा 22 वादों का निस्तारण किया गया। जैनुद्दीन अंसारी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी- द्वारा 02 वादों का, अमर सिंह- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी-02 द्वारा 1 वाद का निस्तारण किया गया। सत्यवीर सिंह मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट द्वारा 3708 वादों का निस्तारण किया गया वहीं पारिवारिक न्यायालय से श्री अहसानुल्लाह खान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय द्वारा 80 वादों का, प्रेम शंकर, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय संख्या-01 द्वारा 65 वादों का, संदीपा यादव, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय संख्या-02 द्वारा 68 वादों का निस्तारण किया गया।
रिपोर्ट-सुबास लाल

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